चीकू एक छोटा, नटखट चूहा था। उसका एक आरामदायक बिल था, जो एक बड़े से पत्थर के नीचे था। वह हर दिन भोजन की तलाश में बाहर निकलता था।
एक दिन, चीकू को खेत में एक बड़ा, हरा और रसीला मटर का दाना मिला। "वाह! यह तो मेरी ज़िंदगी का सबसे बड़ा मटर का दाना है!" उसने खुशी से चिल्लाया।
चीकू बहुत लालची था। उसने मटर के दाने को अपने दोस्तों के साथ बांटने के बारे में नहीं सोचा। उसने सोचा, "यह सब मेरा है!" और उसने पूरा मटर का दाना एक ही बार में निगल लिया।
गटक! मटर का दाना उसके पेट में चला गया। अचानक, चीकू का पेट गुब्बारे की तरह फूलने लगा। वह इतना गोल-मटोल हो गया कि वह मुश्किल से चल पा रहा था।
"अब घर जाने का समय है," उसने कहा और अपने बिल की ओर लुढ़कने लगा। लेकिन जब उसने अंदर घुसने की कोशिश की, तो वह अटक गया! उसका मोटा पेट प्रवेश द्वार में फंस गया था।
"ओह नहीं! मैं फंस गया!" चीकू घबराकर चिल्लाया। उसने धक्का दिया, खुद को खींचा, और अपने पैरों को हिलाया, लेकिन कुछ भी काम नहीं आया।
तभी, पास के पेड़ से एक बुद्धिमान बूढ़े उल्लू, घुग्घू ने उसे देखा। घुग्घू ने नीचे उड़कर पूछा, "क्या बात है, छोटे दोस्त? तुम इतने परेशान क्यों लग रहे हो?"
चीकू ने रोते हुए कहा, "मैंने एक बहुत बड़ा मटर का दाना खा लिया और अब मैं अपने ही घर में नहीं जा पा रहा हूँ।" घुग्घू ने चीकू की हालत देखी और मुस्कुराया।
"चिंता मत करो," घुग्घू ने कहा। "तुम्हें बस थोड़ा व्यायाम करने की ज़रूरत है। थोड़ी देर के लिए कूदो और नाचो, और तुम जल्द ही ठीक हो जाओगे।"
चीकू ने घुग्घू की बात मानी। वह कूदा, नाचा और दौड़ा। जल्द ही, उसका पेट थोड़ा कम हो गया और... पॉप! वह फिसलकर अपने बिल के अंदर चला गया। उस दिन के बाद, चीकू ने सीखा कि थोड़ा सा लालच भी बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है।